‘मंटो’ के किरदार में सही जंच रहे हैं नवाजुद्दीन

बॉलीवुड के वर्सेटाइल एक्टर्स में से एक नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म मंटो आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का निर्देशन एक्ट्रेस और निर्देशक नंदिता दास ने किया है, जिनकी फिल्में हमेशा से ही अलग होती हैं। इस बार नंदिता ने उर्दू शायर मंटो की बायोपिक पर काम किया है। फिल्म में मंटो का किरदार निभा रहे हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी। मंटो की जिंदगी के चार सालों को नंदिता ने फिल्म में दिखाने की कोशिश की।

नंदिता ने मंटो की बायोपिक को शानदार तरीके से दिखाया है। फिल्म की कहानी 1946 की है। शुरुआत मुंबई से होती है। जहां सआदत हसन मंटो (नवाजुद्दीन) अपनी पत्नी सफिया (रसिका दुग्गल) और बेटी निधि के साथ रहते हैं। फिल्म में विभाजन से पहले और उसके बाद को दिखाया गया है। मंटो की मुंबई जिंदगी और विभाजन के बाद उनका लाहौर चले जाना उनका प्रमुख विषय है। विभाजन का मंटो की जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ता है, उनकी कहानियों में अश्लीलता का आरोप आदि को फिल्म में बखूबी दिखाया गया है। वहीं, पाकिस्तान में मंटो की कहानी ठंडा गोश्त कहानी के लिए केस झेलना पड़ता है और इसी के साथ फिल्म में ट्विस्ट आता है, इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

फिल्म की कहानी और उसे दर्शाने का ढंग बेहद दिलचस्प है। 40 के दशक को नंदिता दास ने उस समय प्रयोग में आने वाले उपकरणों और वेशभूषा के साथ-साथ छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखा गया है। मंटो के 4 सालों को नंदिता दास ने 2 घंटे की फिल्म में बखूबी दिखाया है। जो मंटो के बारे में जानते हैं उन्हें ये फिल्म ज्यादा अच्छी लगेगी।

फिल्म की कमजोर कड़ी शायद इसकी शुरुआत है। मंटो को न जानने वाले लोग इससे एकदम इत्तेफाक नहीं रख पाएगा। फिल्म में कई ऐसे किरदार हैं जो 40 और 50 के दशक में काफी मशहूर रहे हैं इससे लोगों को फिल्म को समझने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में बेहतर होगा कि फिल्म मंटो देखने से पहले उसके बारे में कुछ पढ़कर जाएं। फिल्म का बजट ज्यादा नहीं है, बस देखना ये है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या खास कमाल कर पाती है।

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